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Showing posts from August, 2021

सच्चा प्रेम

मन ही मन बड़बड़ा रही थी सरिता,  यह कौन सा प्रेम है । सुरेश की यही आदत मुझे अच्छी न लगती है, सांच को आंच क्या ! अगर मैं सही हूँ उनकी नज़र में तो वो सबके सामने स्वीकार कर सकते हैं ,और गलत हूँ तब भी । पता नही क्यों झूठ से मन झुंझला उठता है ।कमरे में मेरे सामने कहना कि तुम अच्छी हो,और बाकी परवार में किसी के आक्षेप का कोई उत्तर न देना अक्सर विडंबना में डाल देता है कि मेरे और सुरेश के बीच प्रेम और विश्वास है भी की नही । मन ही मन सोचती बड़बड़ाती सरिता अपना काम समेटती  रही।दिन गुजरते रहे ,इस बात की टोह के लिए उसने कोई प्रयास न किया । घर गृहस्थी ऐसी ही होती है शायद औरतें मन ही मन ...... हॉल में शोर सुनकर दरवाजे तक आयी सरिता,अचानक ससुर जी की आवाज़ मैं आजतक सरिता की गलतियां देखता आ रहा पूरे परिवार में उसकी वजह से ही कलह है,सरिता के पैरों तले मानो जमीन नही ... काठ की तरह खड़ी रही दरवाजे से लगकर ,की अचानक सुरेश की तेज आवाज ने तंद्रा तोड़ी,सुरेश कह रहा था ठीक है पिताजी,सरिता इतनी ही गलत है तो मैं और सरिता घर छोड़कर चले जाते हैं । उसके बाद पिताजी बौखला कर बाहर निकल गए,सरिता चुपचाप अपना काम करती रही ,...

बचपना

माँ मैं नही जानती कुछ ।  आप बस पूजा को नही पढ़ाएंगी।  विद्यालय में पढ़ती हैं,ठीक है लेकिन अब घर पर भी ! मुझे अच्छा नही लगता है,पूजा हर चीज़ मेरे जैसी ले लेती है  फ्रॉक, हेयर बैंड,यहां तक कि कॉपी और कलम भी । और अब वो आपसे ट्यूशन्स भी पढ़ेगी !  बताइए जरा फिर उसमें और मुझमे कोई अंतर रह जायेगा क्या ? माँ - बेटी तू तो जानती हैं न! पापा के बाद घर के खर्चे तेरी पढ़ाई सिर्फ स्कूल के तनख्वाह से चला पाना मुश्किल है ,ट्यूशन्स तो लेने पड़ेंगे,और जितने बच्चे आएंगे पैसे भी ज्यादा होंगे । ठीक है माँ मैं अपनी कुछ जरूरते कम कर लूँगी लेकिन आप पूजा को नही पढ़ाएंगी । माँ- बेटा एक बात बता मुझे तुझे पता है तुझमे और पूजा में क्या फर्क है  राधा - नही,मुझे नही जानना ,माँ बस आप बताइए आप मेरी बात मानेंगी या नही । माँ - बेटा, सुन तो ! तू मेरी बेटी है ! और पूजा मेरी छात्रा । राधा - ठीक है माँ ,आप पढ़ाइये, मैं और ज्यादा मेहनत करूँगी और कक्षा में सदा अव्वल आऊंगी और आपका नाम ऊंचा रखूँगी ।।