बचपना

माँ मैं नही जानती कुछ । 
आप बस पूजा को नही पढ़ाएंगी। 
विद्यालय में पढ़ती हैं,ठीक है लेकिन अब घर पर भी !
मुझे अच्छा नही लगता है,पूजा हर चीज़ मेरे जैसी ले लेती है 
फ्रॉक, हेयर बैंड,यहां तक कि कॉपी और कलम भी । और अब वो आपसे ट्यूशन्स भी पढ़ेगी ! 
बताइए जरा फिर उसमें और मुझमे कोई अंतर रह जायेगा क्या ?
माँ - बेटी तू तो जानती हैं न! पापा के बाद घर के खर्चे तेरी पढ़ाई सिर्फ स्कूल के तनख्वाह से चला पाना मुश्किल है ,ट्यूशन्स तो लेने पड़ेंगे,और जितने बच्चे आएंगे पैसे भी ज्यादा होंगे ।
ठीक है माँ मैं अपनी कुछ जरूरते कम कर लूँगी लेकिन आप पूजा को नही पढ़ाएंगी ।
माँ- बेटा एक बात बता मुझे तुझे पता है तुझमे और पूजा में क्या फर्क है 
राधा - नही,मुझे नही जानना ,माँ बस आप बताइए आप मेरी बात मानेंगी या नही ।
माँ - बेटा, सुन तो ! तू मेरी बेटी है ! और पूजा मेरी छात्रा ।
राधा - ठीक है माँ ,आप पढ़ाइये, मैं और ज्यादा मेहनत करूँगी और कक्षा में सदा अव्वल आऊंगी और आपका नाम ऊंचा रखूँगी ।।

Comments

Popular posts from this blog

शिक्षक

खुशी

क्रोध ( विधा : लघुकथा)