शिक्षक

मध्यांतर की घण्टी और सभी शिक्षकों का जुटाव 
शिक्षक आराम कक्ष में,सबने अपने अपने टिफिन को खोला और खाने के साथ साथ परिचय शुरू हुआ,कौन कहाँ से है,किसने कितनी बार मे परीक्षा पास की,शब्दों के समूह से बनते वाक्य और हवा के सहारे लहराता मेरे कानों तक पहुंचा, अरे मैं तो आईएएस की तैयारी में संलग्न था,साथ साथ बीएड कर लिया मौका लगते परीक्षा दी और उतीर्ण कर यहां जॉइन किया,रोजी रोटी के लिए कुछ तो आय चाहिए, बस गाँव ही चाहिए था,मुझे जहां काम का बोझ न हो ज्यादा और मैं अपनी तैयारी जारी रख सकूँ।तभी दूसरे अध्यापक बीच मे ही बोले,मैं भी मेडिकल की न जाने कितने प्रयास किये सफल न हो पा रहा था साथ साथ बीएड भी कर लिया और आज यहॉं हूँ, पूरे मध्यांतर शब्दों के कई समूह कानों तक आते गए न जाने कितनी मजबूरियों ने पूरे विद्यालय को नए स्टाफ दे दिए।

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